Sunday, June 22, 2008

तलाश

रगों में दौड़ती ज़हर
तलाशती
है मौत,
दिलकी गुमनाम गलियों में अधूरी यादें
तलाशती
है चाहत,

खूब चोट खाए हैं हम इन चाहत की गलिओयों में
ज़ख्मों से डरता नहीं यह दिल,
इन ज़ख्मों में ही यह
तलाशती
है रहत.......

Saturday, June 7, 2008

एक और दीवाना ........

टूटे दिल्के टुकड़े हज़ार हुए,

चुभते नहीं , यह आंखों में बस जातें हैं,

चुभते नही यह आंखों में बस जातें हैं,

उनमें आपका ही चेहरा जो नज़र आता हैं



लाख समझाता हूँ इस दिल को ,

बिखर चुके हैं यह, इन्हे मत समेत;

दिल कहता है पागल ,

इन टुकडों में ही तोह हमारी जहाँ बसी हैं........