टूटे दिल्के टुकड़े हज़ार हुए,
चुभते नहीं , यह आंखों में बस जातें हैं,
चुभते नही यह आंखों में बस जातें हैं,
उनमें आपका ही चेहरा जो नज़र आता हैं।
लाख समझाता हूँ इस दिल को ,
बिखर चुके हैं यह, इन्हे मत समेत;
दिल कहता है पागल ,
इन टुकडों में ही तोह हमारी जहाँ बसी हैं........
चुभते नहीं , यह आंखों में बस जातें हैं,
चुभते नही यह आंखों में बस जातें हैं,
उनमें आपका ही चेहरा जो नज़र आता हैं।
लाख समझाता हूँ इस दिल को ,
बिखर चुके हैं यह, इन्हे मत समेत;
दिल कहता है पागल ,
इन टुकडों में ही तोह हमारी जहाँ बसी हैं........
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