Saturday, September 27, 2008

वक्त

आज एक और कौशिश रह गई नाकाम,
ख़ुद से आगे बढ़ नही पाए हम भुलाके आपका नाम.....

मीलेथे हम से अनजान मुसाफिर के तरह
हम नादान ख्वाब सजा लीये हमसफ़र बनने की....

वक्त रुका आप ना रुके , आगे नीकल गए सब
सवाल हमारा है इतना बस
आय वक्त हमको अपने साथ ले चलेगा कब?????

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